बरेली। करोड़ों रुपये की कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहे कन्हैया गुलाटी के नेटवर्क पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। डीआईजी बरेली रेंज अजय कुमार साहनी की सख्ती के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 24 घंटे के भीतर गुलाटी से जुड़े दो आरोपियों विशाल शर्मा और विनय श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी को मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
वायरल वीडियो सामने आते ही सख्त हुए डीआईजी
मामले में नया मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन मीटिंग की स्क्रीन रिकॉर्डिंग सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मीटिंग में कन्हैया गुलाटी के नेटवर्क से जुड़े लोगों की बातचीत के दौरान डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसपी सिटी मानुष पारीक के नाम का जिक्र किया गया और अधिकारियों से बातचीत होने जैसे दावे किए गए।
हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। इसके उलट मामला संज्ञान में आते ही डीआईजी ने सख्त रुख अपनाया और पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस और एसओजी की टीमें सक्रिय हुईं और करीब 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को पकड़ लिया गया।
नाम का सहारा लेना नहीं आया काम
ऑनलाइन मीटिंग में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने के बावजूद आरोपी पुलिस कार्रवाई से बच नहीं सके। डीआईजी स्तर से मामले को गंभीरता से लिए जाने के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश तेज कर दी।
पुलिस की कार्रवाई ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी वरिष्ठ अधिकारी का नाम लेकर पुलिस कार्रवाई से बचने का दावा अपने आप में सुरक्षा नहीं देता। वीडियो में अधिकारियों को लेकर किए गए कथित दावों की वास्तविकता भी जांच का विषय है।
विशाल शर्मा और विनय श्रीवास्तव गिरफ्तार
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इज्जतनगर क्षेत्र के आलोक नगर निवासी विशाल शर्मा और गोरखपुर के कौआ बाग रेलवे कॉलोनी निवासी विनय श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पर कन्हैया गुलाटी के लिए करीब 1.40 करोड़ रुपये का निवेश कराने का आरोप है।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से कन्हैया गुलाटी के ठिकाने, संपर्क के माध्यम और कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में पूछताछ की गई। इसके बाद दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर दावा किया कि पिछले करीब 10 महीने से उनका कन्हैया गुलाटी से सीधा संपर्क नहीं हुआ है। पुलिस अब आरोपियों के बयानों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर आगे की जांच कर रही है।
करोड़ों की कथित धोखाधड़ी का है मामला
कन्हैया गुलाटी से जुड़े प्रकरण में आरोप है कि निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर बड़ी रकम निवेश कराई गई। निवेशकों की रकम वापस नहीं मिलने के बाद अलग-अलग स्थानों पर शिकायतें सामने आईं और मुकदमे दर्ज किए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स में कथित धोखाधड़ी की रकम करीब 800 करोड़ रुपये तक बताई गई है। गुलाटी पर इनाम घोषित होने और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने की जानकारी भी रिपोर्ट्स में सामने आई है। अलग-अलग जिलों में गुलाटी और उसके कथित नेटवर्क से संबंधित बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं।
अब मुख्य आरोपी की तलाश पर फोकस
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का फोकस अब मुख्य आरोपी कन्हैया गुलाटी और उसके कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों पर है। डिजिटल साक्ष्यों, आरोपियों से हुई पूछताछ और पुराने मामलों से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस आगे की कड़ियां जोड़ रही है।
पूरे घटनाक्रम में डीआईजी अजय कुमार साहनी की सख्ती के बाद हुई तेज कार्रवाई प्रमुख रूप से सामने आई है। ऑनलाइन मीटिंग में वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का कथित इस्तेमाल सामने आने के बाद मामला तत्काल संज्ञान में लिया गया और करीब 24 घंटे में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। अब पुलिस की अगली चुनौती फरार मुख्य आरोपी तक पहुंचने और कथित निवेश धोखाधड़ी के पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाने की है।






