जयपुर: राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों ने राज्य की सियासत में दिलचस्प तस्वीर पेश की है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर एक प्रतिशत से भी कम रहा। हालांकि, वार्डों में जीत के आंकड़े भाजपा के पक्ष में रहे और पार्टी ने कांग्रेस की तुलना में 566 अधिक वार्डों में जीत दर्ज की।
वोट शेयर में दोनों दलों के बीच मामूली फासला
निकाय चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल वोट शेयर में बहुत ज्यादा अंतर नहीं रहा। दोनों प्रमुख दलों को मिले मतों के बीच अंतर एक प्रतिशत से कम बताया गया है। ऐसे में चुनाव परिणाम यह संकेत देते हैं कि जमीनी स्तर पर दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा।
वार्ड जीतने में भाजपा ने बनाई बड़ी बढ़त
वोट शेयर में मामूली अंतर के बावजूद वार्डों की संख्या में भाजपा ने कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ा। भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले 566 अधिक वार्डों में जीत हासिल की। यही अंतर निकाय चुनाव के अंतिम राजनीतिक समीकरण में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पांच पार्टियों को NOTA से भी कम वोट
चुनाव में कई अन्य राजनीतिक दल अपनी मौजूदगी प्रभावी तरीके से दर्ज नहीं करा सके। RLP और AAP समेत पांच राजनीतिक पार्टियों को NOTA से भी कम वोट मिले। इससे साफ है कि प्रमुख मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही केंद्रित रहा, जबकि अन्य दल मतदाताओं पर बड़ा प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे।
क्या कहते हैं चुनाव के आंकड़े?
राजस्थान के इन निकाय चुनावों में एक तरफ भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बेहद कम रहा, वहीं दूसरी ओर वार्ड जीतने में भाजपा की बढ़त काफी बड़ी रही। यही विरोधाभास चुनाव परिणाम को खास बनाता है। अब इन नतीजों को आगामी राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और दोनों प्रमुख दलों की रणनीति के लिहाज से भी देखा जा रहा है।





