बरेली। थाना सीबीगंज क्षेत्र स्थित नगर निगम की नन्दोशी गौशाला में गोवंश की कथित बदहाली और कई गायों की मौत से जुड़े बताए जा रहे वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला गरमा गया है। वायरल वीडियो को लेकर गौ रक्षक दल से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उनका आरोप है कि गौशाला में लंबे समय से व्यवस्थाएं ठीक नहीं हैं और इससे पहले भी मृत गोवंश को कथित रूप से चुपचाप दफनाया जाता रहा है।
हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो कब के हैं, उनमें दिखाई दे रहे गोवंश की मौत किन परिस्थितियों में हुई और गौशाला में वास्तविक स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग या जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हो सकेगी।
वायरल वीडियो से सामने आया मामला
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को नन्दोशी स्थित नगर निगम की गौशाला का बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद गौवंश की देखभाल, चारे, स्वास्थ्य परीक्षण और बीमार पशुओं के उपचार की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गौ रक्षक दल से जुड़े लोगों का दावा है कि गौशाला में कई गोवंश की मौत हुई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बीमार और कमजोर पशुओं का उचित उपचार कराया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
पहले भी मृत गायों को दफनाने का आरोप
गौ रक्षक दल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी गौशाला में मरने वाले कई गोवंश को बिना जानकारी सार्वजनिक किए कथित तौर पर दफना दिया गया था।
इन आरोपों ने गौशाला के संचालन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पहले भी गोवंश की मौत हुई थी तो उसका रिकॉर्ड क्या है, पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था किस स्तर पर की जा रही थी और मृत गोवंश के निस्तारण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग की जा रही है।
नगर निगम की जिम्मेदारी पर सवाल
नगर निगम द्वारा संचालित गौशालाओं में बेसहारा गोवंश को सुरक्षित रखने, पर्याप्त चारा और पानी उपलब्ध कराने तथा जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सकीय सुविधा देने की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे में वायरल वीडियो के बाद सवाल उठ रहा है कि नन्दोशी गौशाला में नियमित निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी और कर्मचारी के पास थी। पशुओं की संख्या के अनुपात में चारे और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति क्या थी और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा गौशाला का अंतिम निरीक्षण कब किया गया था, यह भी जांच का विषय बन सकता है।
गौ रक्षक दल में आक्रोश
मामला सामने आने के बाद गौ रक्षक दल के पदाधिकारियों में नाराजगी बताई जा रही है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि गोवंश संरक्षण के नाम पर गौशालाओं का संचालन किया जा रहा है तो वहां रहने वाले पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जांच से साफ होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों को लेकर आधिकारिक जांच बेहद महत्वपूर्ण है। वीडियो की तारीख, स्थान, मृत बताए जा रहे गोवंश की वास्तविक संख्या, मृत्यु के कारण और संबंधित अभिलेख सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकेगी।
प्रशासन और नगर निगम की ओर से यदि विस्तृत जांच कराई जाती है तो यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि गौशाला में पशुओं की मौत सामान्य बीमारी या अन्य कारणों से हुई अथवा देखरेख में किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई।
सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदारी का है। यदि वायरल वीडियो और गौ रक्षक दल के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल गौशाला की व्यवस्था पर सवाल नहीं होगा, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी।
अब नजर इस बात पर है कि नगर निगम और प्रशासन वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं और जांच में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कब और क्या कार्रवाई की जाती है।






