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विभूतिपुर में दुष्कर्म के दो मामलों से सवाल: एक में नाबालिग, दूसरे में गर्भवती होने का आरोप; दोनों में गिरफ्तारी का इंतजार

लोकेशन : समस्तीपुर
रिपोर्ट : नवनीत कुमार झा

एक मामले में पॉक्सो के तहत FIR, दूसरे मामले में भी प्राथमिकी दर्ज; दोनों मामलों में अब तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं

समस्तीपुर। विभूतिपुर थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक मामले में नाबालिग छात्रा के कथित यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और अश्लील तस्वीरें वायरल करने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में 23 वर्षीय युवती से कथित दुष्कर्म और उसके करीब चार माह की गर्भवती होने का दावा किया गया है।

दोनों मामलों में आरोपितों के शिक्षण कार्य से जुड़े होने की चर्चा है। हालांकि, आरोपितों की सरकारी शिक्षक के रूप में स्थिति की आधिकारिक पुष्टि पुलिस स्तर से नहीं हुई है। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

पहला मामला: नाबालिग छात्रा से कथित यौन शोषण

पहले मामले में पीड़िता की मां की शिकायत पर महिला थाना में कोचिंग शिक्षक समेत दो नामजद आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शिकायत के अनुसार, पीड़िता करीब दो वर्ष पूर्व गांव के एक कोचिंग संस्थान में दसवीं कक्षा की छात्रा थी। आरोप है कि कोचिंग में कार्यरत एक शिक्षक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया और कथित तौर पर उसका अश्लील वीडियो बना लिया। शिकायत में दूसरे शिक्षक पर भी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता का यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया है।

बाद में अश्लील तस्वीरें और वीडियो पीड़िता के परिजनों तथा अन्य लोगों तक भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया।

महिला थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज होने, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और बयान की प्रक्रिया पूरी होने की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार मामले का अनुसंधान जारी है और नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी फिलहाल नहीं हुई है। प्रारंभिक जांच में फेसबुक और व्हाट्सएप से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात भी सामने आई है।

दूसरा मामला: दुष्कर्म का आरोप, गर्भवती होने का दावा

दूसरे मामले में भी प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। पीड़िता की मां के आवेदन के आधार पर योग प्रशिक्षक, उसकी पत्नी समेत अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि योग प्रशिक्षण के दौरान युवती का आरोपी से संपर्क हुआ और बाद में अलग-अलग स्थानों पर उसके साथ जबरदस्ती की गई। आवेदन में पटना के एक होटल में भी घटना होने का आरोप लगाया गया है।

परिवार का दावा है कि 20 जुलाई 2026 को कराए गए अल्ट्रासाउंड में युवती के करीब चार माह की गर्भावस्था की जानकारी सामने आई। इसके बाद परिवार ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई।

इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद खबर लिखे जाने तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस की ओर से मामले में अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारी नहीं होने के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

दोनों मामलों ने खड़े किए कई सवाल

दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से अब पुलिस की जांच और कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब एक मामले में पॉक्सो जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं और दूसरे मामले में दुष्कर्म के साथ गर्भावस्था का दावा सामने आया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? क्या पुलिस को आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिल चुके हैं? क्या आरोपितों से पूछताछ हुई है? क्या मोबाइल, सोशल मीडिया, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों की जांच पूरी हुई है? पुलिस इन मामलों में आगे क्या कार्रवाई करने जा रही है?

शिक्षक पर लगे आरोप ने बढ़ाई चिंता

दोनों मामलों में शिक्षण कार्य से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की चर्चा ने सामाजिक चिंता भी बढ़ा दी है। शिक्षक बच्चों के भविष्य का निर्माता और मार्गदर्शक माना जाता है। ऐसे में यदि किसी शिक्षक पर इस तरह के गंभीर आरोप लगते हैं तो विद्यालय और समाज में बच्चों की सुरक्षा तथा शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, केवल आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं होता। दोनों मामलों में आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर

दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। अब पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। सवाल यह है कि पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी कब तक करती है और जांच को किस निष्कर्ष तक पहुंचाती है।

फिलहाल दोनों मामलों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। पुलिस का आधिकारिक पक्ष और आगे की कार्रवाई सामने आने पर उसे अगली रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

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