रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के भवन निर्माण को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के अपने ही जवाब से यह स्पष्ट होता है कि निर्माण से पहले अनुमति लेने की प्रक्रिया की जानकारी थी। ऐसे में बिना स्वीकृति बने अन्य भवनों पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि दो भवनों के निर्माण के लिए जिला पंचायत से अनुमति प्राप्त की गई थी। प्राधिकरण का कहना है कि इससे यह साबित होता है कि निर्माण कार्य के लिए सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेने की आवश्यकता से संस्थान परिचित था।
आदेश में कहा गया है कि यदि दो भवनों के लिए विधिक स्वीकृति ली गई, तो बाकी 38 भवनों का निर्माण बिना अनुमति किए जाने को नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी निर्माण की वैधता का आकलन उसी समय लागू कानून और संबंधित प्राधिकरण की स्वीकृति के आधार पर किया जाता है।
जिला प्रशासन का कहना है कि बाद में दिए गए कानूनी तर्क या व्याख्याएं बिना पूर्व स्वीकृति किए गए निर्माण को स्वतः वैध नहीं बना सकतीं। इसी आधार पर प्राधिकरण ने अपने आदेश में निर्माण संबंधी नियमों के पालन को आवश्यक बताया है।





