Home / News / बरेली के डीएम कार्यालय के बाहर लालसिंह ने पत्नी-बेटी संग ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मदाह का किया प्रयास, एलआईयू और इंटेलिजेंस , होमगार्ड टीम की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

बरेली के डीएम कार्यालय के बाहर लालसिंह ने पत्नी-बेटी संग ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मदाह का किया प्रयास, एलआईयू और इंटेलिजेंस , होमगार्ड टीम की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

बरेली। जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर गुरुवार को एक बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब एक व्यक्ति अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी के साथ आत्मदाह करने पहुंच गया। मौके पर तैनात इंटेलिजेंस के ओमपाल सिंह और एलआईयू के अमित कुमार , होमगार्ड संदीप मिश्रा ने सतर्कता दिखाते हुए परिवार को समय रहते बचा लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही टीम ने व्यक्ति को अपने ऊपर पेट्रोल डालते देखा, उसकी ओर दौड़े और उसे काबू में लेकर आग लगाने से रोक दिया। अधिकारियों के मुताबिक, यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ा हादसा हो सकता था।

थाना मीरगंज क्षेत्र के गांव खमरिया साहनी का रहने वाला पीड़ित 47 वर्षीय लालसिंह गंगवार ने अपनी पत्नी 46 वर्षीय राजरानी और 8 वर्षीय बेटी नंदनी के साथ जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर पहुंचा और पूरे परिवार पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया पेट्रोल ऊपर डालते हुए देखा इंटेलिजेंस के ओमपाल सिंह और एलआईयू के अमित कुमार , होमगार्ड संदीप मिश्रा ने भागकर पूरे परिवार को बचा लिया।

पूरा मामला यह है कि मीरगंज तहसील स्थित ग्राम खमरिया सानी में सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर विवाद गहरा गया है। लाल सिंह और सुंदर लाल ने आरोप लगाया कि चन्द्रपाल व होमगार्ड रामप्रकाश को एसडीएम मीरगंज के यहां तैनात है ने मंडनपुर रोड से जुड़ने वाले सरकारी रास्ते पर वाहन खड़े कर, पशु बांधकर और लकड़ी रखकर आवागमन बाधित कर दिया है। राजस्व टीम की स्थलीय जांच में मौके पर अस्थायी कब्जा मिलने की बात सामने आई, जबकि विपक्ष ने संबंधित भूमि को 1959 के बैनामे से खरीदी गई निजी संपत्ति बताया।
जांच के दौरान चन्द्रपाल और रामप्रकाश मौके पर उपस्थित नहीं हुए। अधिकारियों ने बताया कि 1959 के बाद 1986 में चकबंदी हो चुकी है, इसलिए पुराने बैनामे की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। रिपोर्ट में उल्लेख है कि रास्ते को लेकर गांव में तनाव बना हुआ है और पुलिस बल की मौजूदगी में ही विवाद का समाधान संभव है। इससे पहले वर्ष 2023 में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था तथा 2025 में रास्ते से अतिक्रमण भी हटवाया गया था।
वहीं, राजस्व विभाग की दूसरी जांच में मामले को आबादी भूमि का विवाद बताते हुए कहा गया कि मानचित्र में रास्ता दर्ज नहीं है और शिकायतकर्ता के पास वैकल्पिक निकास उपलब्ध है।

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