देशभर में महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है। चुनाव के बाद कीमतों पर लगी रोक हटने के बाद परिवहन लागत बढ़ने और महंगाई पर दबाव और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में हो रहे बदलावों के पीछे के कारण और इसके आर्थिक असर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 मई से अब तक पेट्रोल-डीजल में करीब 5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि सीएनजी के दाम भी बढ़े हैं। जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव और कमजोर रुपये के कारण ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई थीं, हालांकि मार्च 2024 में चुनाव से पहले मामूली कटौती की गई थी। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी कारणों से कीमतों में लंबे समय तक संशोधन नहीं किया गया।15 मई के बाद कीमतों में बढ़ोतरी शुरू होने को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कीमतें बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियां अभी भी घाटे में चल रही हैं।
अनुमान है कि वे हर दिन सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर अब भी घाटा बना हुआ है, हालांकि हालिया बढ़ोतरी से यह नुकसान थोड़ा कम हुआ है। इसका सीधा असर माल ढुलाई और बाजार पर पढ़ रहा है। जिससे कीमतों में उछाल आयी है ,अप्रैल में महंगाई दर बढ़कर 3.48% और थोक महंगाई दर 42 महीने के अधिकतम स्तर 8.3% पर पहुंच गई है, जिसका मुख्य कारण ईंधन और ऊर्जा की कीमतें बढ़ना है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगो से ईंधन की बचत करने की अपील की है। अन्य राज्य के लोगो ने भी लोगों से ईंधन की बचत करने अपील की है।
रिपोर्ट – किरन






