डायल 112 पर शिकायत और परिजनों के विरोध के बावजूद कथित तौर पर कराया गया निकाह, पॉक्सो कार्रवाई से बचने की साजिश की आशंका; ग्राम प्रधान, बिचौलियों और पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के क्योलड़िया थाना क्षेत्र स्थित भौआ बाजार में एक नाबालिग लड़की की कथित शादी का मामला सामने आया है। आरोप है कि महज 16 वर्षीय लड़की का 20 अप्रैल 2026 को राशिद नामक युवक से निकाह करा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में ग्राम प्रधान जुल्फिकार और स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। दावा है कि लड़की के परिजनों ने विवाह का विरोध किया और डायल 112 पर पुलिस को सूचना भी दी, लेकिन इसके बावजूद कथित निकाह संपन्न हो गया।
परिजनों के विरोध के बावजूद कैसे हुआ नाबालिग का निकाह?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भौआ बाजार निवासी मोहम्मद शाहरुन की नाबालिग बेटी का निकाह राशिद पुत्र सगीर अहमद के साथ कराए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि राशिद ने लड़की से प्रेम संबंध स्थापित किए और बाद में उस पर घर से भागने का दबाव बनाया। परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध किया।
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर लड़की के पिता ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कथित तौर पर केवल शांति भंग की आशंका से संबंधित कार्रवाई की गई। सवाल है कि यदि पुलिस को लड़की के नाबालिग होने की जानकारी थी, तो बाल विवाह रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?
ग्राम प्रधान जुल्फिकार की भूमिका पर गंभीर सवाल
मामले में ग्राम प्रधान जुल्फिकार की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में लाने की मांग की जा रही है। आरोप है कि परिजनों की आपत्ति और लड़की की कथित असहमति के बावजूद विवाह संपन्न कराने में उनकी भूमिका रही।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि लड़की विवाह नहीं करना चाहती थी, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय निकाह किन परिस्थितियों में कराया गया? क्या संबंधित अधिकारियों को लड़की की वास्तविक उम्र बताई गई थी? क्या बाल कल्याण समिति को सूचना दी गई? इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिल सकते हैं।
पॉक्सो कार्रवाई से बचने के लिए निकाह कराने की आशंका
इस प्रकरण में यह आशंका भी जताई गई है कि संभावित पॉक्सो कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से विवाह कराया गया। हालांकि, इस आरोप की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार, लड़की के राशन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 2010 दर्ज बताई गई है। यदि यह जन्मतिथि सही है, तो 20 अप्रैल 2026 को उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष तीन महीने थी। हालांकि, उम्र की कानूनी पुष्टि के लिए विद्यालय के रिकॉर्ड और जन्म प्रमाणपत्र जैसे विश्वसनीय दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
कानूनी रूप से नाबालिग का विवाह हो जाने मात्र से संभावित यौन अपराधों की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। हालांकि, पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध हुआ है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
राजू उर्फ दद्दा और कथित गवाहों की भूमिका की भी जांच की मांग
इस मामले में भूता थाना क्षेत्र के मगरासा गांव निवासी राजू उर्फ दद्दा का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उसने युवक के पिता और पुलिस के बीच संपर्क स्थापित कराने में भूमिका निभाई।
वहीं, कथित निकाह के गवाहों के रूप में मुजफ्फर और इसरार अहमद के नाम बताए जा रहे हैं। निकाह पढ़ाने वाले मौलवी की भूमिका की जांच की मांग भी उठ रही है। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों पर लगाए गए आरोप अभी प्रमाणित नहीं हैं।
लड़की की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता
आरोपों के अनुसार, विवाह से इनकार के बाद युवक ने कथित तौर पर खुद को चोट पहुंचाई और लड़की के घर पहुंचा। इससे लड़की के भयभीत होने तथा बाद में उसके द्वारा फांसी लगाने का प्रयास किए जाने की बात भी सामने आई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया गया है कि 22 अप्रैल को परिवार से मिलने पहुंची एक टीम को परिजन भयभीत दिखाई दिए। ऐसे में लड़की की वर्तमान सुरक्षा, उसकी स्वतंत्र इच्छा और परिवार पर किसी संभावित दबाव की जांच महत्वपूर्ण है।
सवालों के घेरे में पुलिस की कार्यशैली, निष्पक्ष जांच जरूरी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब लड़की के नाबालिग होने, परिवार के विरोध और डायल 112 पर सूचना देने के आरोप सामने आए हैं, तो कथित निकाह रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
डायल 112 की कॉल डिटेल, पुलिस की कार्रवाई का रिकॉर्ड, लड़की के आयु संबंधी दस्तावेज और निकाह से जुड़े साक्ष्य इस प्रकरण की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
फिलहाल ग्राम प्रधान जुल्फिकार, संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य आरोपित व्यक्तियों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। आरोपों की पुष्टि और किसी की कानूनी जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। सबसे पहली प्राथमिकता नाबालिग लड़की की सुरक्षा और उसके अधिकारों का संरक्षण होना चाहिए।







