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उत्तराखंड में पहली बार, विपक्ष की शिकायत लेकर सत्ता पक्ष पहुंचा राजभवन;

प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा ने गुरुवार को विपक्षी दल कांग्रेस के खिलाफ राजभवन में दस्तक दी।

राज्य में ऐसा पहली बार हुआ जब सत्ता पक्ष ने विपक्ष के खिलाफ राजभवन में गुहार लगाई है। 

देहरादून, उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्षी दल कांग्रेस के खिलाफ राजभवन में दस्तक दी। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की अगुआई में भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।

राज्य के राजनीतिक इतिहास में ये पहला मौका है, जब सत्ता पक्ष ने विपक्ष के खिलाफ राजभवन में गुहार लगाई है। 

भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस उसकी सरकार के जनहित के कार्यों को बाधित करने के लिए भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है। बाद में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को भी ज्ञापन सौंपा। 

प्रदेश अध्यक्ष एवं सासद अजय भट्ट के नेतृत्व में राजभवन पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात के दौरान राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के समक्ष कांग्रेस की ओर से किए जा रहे दुष्प्रचार की जानकारी देने के साथ ही भाजपा का पक्ष भी रखा।बताया कि पंचायत चुनाव की आचार संहिता की आड़ लेकर कांग्रेस प्रदेश में चल रही ‘मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना’ को रुकवाना चाहती है, जबकि यह आचार संहिता लगने से पूर्व लागू हो चुकी थी।

काग्रेस दुष्प्रचार कर गरीबों के हित वाली इस योजना को बाधित करना चाहती है। ज्ञापन में राज्यपाल से आग्रह किया गया कि वह मामले को संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करें। 

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष भट्ट के अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला, महामंत्री खजानदास, महापौर सुनील उनियाल, विधायक शक्ति लाल शाह, प्रदेश प्रवक्ता विरेंद्र बिष्ट, प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ.देवेंद्र भसीन, महानगर अध्यक्ष विनय गोयल, जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह पुंडीर, दायित्वधारी रविंद्र कटारिया, सह मीडिया प्रभारी शादाब शम्स, बलजीत सोनी, संजीव वर्मा, विशाल गुप्ता थे। 

बाद में पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने कहा कि आज हमें विवश होकर राज्यपाल के पास आना पड़ा है। वर्तमान में पंचायत चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में काग्रेस को बेनकाब करने को न प्रदर्शन हो सकता है और न अन्य कोई आंदोलनकारी कदम ही उठा सकते हैं।

इस स्थिति में भाजपा ने अपनी बात राज्य के संवैधानिक प्रमुख के पास रखी है। 

‘कांग्रेस सरकार’ के जनविरोधी कार्य 

राज्य निर्वाचन आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन ने भाजपा की किरकिरी भी करा दी। ज्ञापन के शुरुआती पैराग्राफ में तो कांग्रेस पर आरोप लगाया गया है।

अलबत्ता, दूसरे पैराग्राफ की बानगी देखिये, ‘इस क्रम में हम आपका ध्यान कांग्रेस सरकार के नवीनतम जनविरोधी कार्य व दुष्प्रचार की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं..।’ इससे साफ है कि पार्टी ने हड़बड़ी में ज्ञापन तैयार कर इसे दोबारा देखा तक नहीं।

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