February 7, 2023

Express News Bharat

Express News Bharat 24×7 National Hindi News Channel.

Express News Bharat

Kota;जांच कमेटी की रिपोर्ट:बच्चों की मौत का कारण बनी ठंड,अस्पताल में लगभग हर तरह के उपकरणों और व्यवस्था में पाई गई खामियां!

  • कोटा के जेके लोन अस्पताल में बीते 34 दिनों में दम तोड़ने वाले बच्चों की संख्या शुक्रवार को 106 हो गई
  • मंत्री रघु शर्मा ने अस्पताल में ऑक्सीजन लाइन के निर्माण से लेकर उपकरणों को खरीदने की स्वीकृति दी
  • अस्पताल में 71 में से 44 वॉर्मर खराब, 28 में से 22 नेबुलाइजर खराब, 40 पलंगों की भी जरूरत

जयपुर ).कोटा के अस्पताल में बच्चों की मौत की जांच के बाद गठित कमेटी ने दो दिन पहले ही रिपोर्ट सौंपी है। वह बताती है कि अस्पताल में लगभग हर तरह के उपकरण और व्यवस्था में खामियां हैं। बच्चों की मौत का प्रमुख कारण हाइपोथर्मिया बताया गया है, मगर सच्चाई ये है कि इससे बच्चों को बचाने के लिए जरूरी हर उपकरण अस्पताल में खराब है। कोटा के जेके लोन अस्पताल में बीते 34 दिनों में दम तोड़ने वाले बच्चों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 106 हो गई।

दरअसल, गर्भ से बाहर आने के बाद नवजात को 36.5 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान चाहिए होता है। नर्सरी में वॉर्मर के जरिए तापमान को 28-32 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाता है। अस्पताल में मशीन खराब होने के कारण बच्चे हाइपोथर्मिया के शिकार हुए। अस्पताल में 71 में से 44 वॉर्मर खराब हो चुके हैं।

बेड की कमी से इन्फेक्शन की समस्या:

ये उपकरण भी काम के नहीं

  •  28 में से 22 नेबुलाइजर खराब
  •  111 में से 81 इंफ्यूजन पंप खराब
  •  101 में 28 मल्टी पेरा मॉनीटर खराब
  •  38 में से 32 पल्स ऑक्सीमीटर खराब
  • अस्पताल में कम से कम 40 बेड और चाहिए। प्रदेश के सारे अस्पतालों में अभी कुल 4100 बेड की जरूरत है।
  • कोटा के अस्पताल में ऑक्सीजन पाइपलाइन ही नहीं है। सिलेंडर से ऑक्सीजन दिया जाता है। यही स्थिति जोधपुर, उदयपुर अजमेर और बीकानेर की भी है।
  • हर तीन माह में आईसीयू को फ्यूमिगेट कर इन्फेक्शन दूर करना जरूरी है। 5-6 महीनों तक यह काम नहीं किया जाता है।
  • ये स्थिति राज्य के हर अस्पताल की है। मरीज के इलाज का रिकॉर्ड रखा ही नहीं जाता। ऐसे में केस हिस्ट्री और उससे सुधार के सुझावों की गुंजाइश नहीं है।
Share
Now