New year'2020' दुनिया में 96 तरह के कैलेंडर, अकेले भारत में 12 अलग-अलग नया साल मनाने की परंपरा!! - Express News Bharat
September 24, 2023

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New year’2020′ दुनिया में 96 तरह के कैलेंडर, अकेले भारत में 12 अलग-अलग नया साल मनाने की परंपरा!!

  • भारत के कुल 36 कैलेंडर्स में से 24 अब चलन में नहीं
  • पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के एक हिस्से में नया साल 30 अक्टूबर से शुरू माना जाता है 
  • ज्यादातर देशों के कैलेंडर्स में फरवरी से अप्रैल के बीच नया साल शुरू होता है

इंटरनेशनल डेस्क. नया साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक शुरू होगा। इसे अंग्रेज अपनी संस्कृति और जीवन का हिस्सा मानते हैं। चूंकि, ब्रिटिश साम्राज्य ने लगभग हर जगह राज किया, इसलिए दुनिया में सबसे ज्यादा मान्यता ग्रेगोरियन कैलेंडर की ही है। लेकिन हर देश और संस्कृति की अपनी एक अलग कालगणना और अपना अलग कैलेंडर है। एक आंकड़े के मुताबिक, दुनियाभर में 96 तरह के कैलेंडर हैं। अकेले भारत में 36 कैलेंडर या पंचांग हैं। इनमें से 12 आज भी चलन में हैं। 24 चलन से बाहर होचुके हैं। दुनिया में जितने कैलेंडर इस समय चलन में हैं, इनमें से ज्यादातर के नए साल की शुरुआत फरवरी से अप्रैल के बीच होती है।


किरिबाती में सबसे पहले और सबसे आखिर में हॉउलैंड में नया साल शुरू होगा

  • प्रशांत महासागर के किरिबाती द्वीप और समोआ द्वीप के समोआ राज्य में सबसे पहले न्यू ईयर मनेगा। इन जगहों पर 31 दिसंबर को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:30 बजे नया साल मना लिया जाएगा। इसके बाद न्यूजीलैंड के चाथम द्वीपसमूह में न्यू ईयर मनेगा। इस समय भारत में 31 दिसंबर को दोपहर 3:45 बज रहे होंगे।
  • इसी क्रम में चीन, जापान और सिंगापुर सहित 14 देश भारत से पहले न्यू ईयर मना चुके होंगे। भारत 15वें नंबर पर रहेगा। फिर आधे घंटे बाद पाकिस्तान में नया साल मनाया जाएगा। सबसे आखिरी में प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित हॉउलैंड नाम के एक आइलैंड और हवाई और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्थित बेकर आइलैंड में नया साल शुरू होगा, तब भारत में 1 जनवरी को शाम के 05:30 बज चुके होंगे।

चीनी नववर्ष जनवरी-फरवरी के बीच शुरू होता है
ज्यादातर कैलेंडर धर्म और संस्कृति के आधार पर हैं। कुछ कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होते हैं। कुछ सौर चक्र पर। जैसे- चीनी कैलेंडर लुनिसोलर। दुनियाभर में कैलेंडरों के अलग-अलग आधार होने के कारण ग्रेगोरियन कैलेंडर में नया साल अलग-अलग समय मनाया जाता है। कुछ देशों में तो नया साल कई दिनों तक होता है। उदाहरण के तौर पर इथियोपियाई नववर्ष हर साल 11 सितंबर को पड़ता है। चीनी नववर्ष 21 जनवरी और 20 फरवरी के बीच कभी भी हो सकता है। आज भी दुनिया कैलेंडर प्रणाली पर एकमत नहीं है। दुनिया में सर्वाधिक प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर है। इसे पोप ग्रेगरी-13 ने 24 फरवरी 1582 को लागू किया था। यह कैलेंडर 15 अक्टूबर 1582 में शुरू हुआ।

भारत के ये 24 संवत अब चलन में नहीं
स्वयंभू मनु संवत्सर, सप्तऋषि संवत, गुप्त संवत, युधिष्ठिर संवत, कृष्ण संवत, ध्रुव संवत, क्रोंच संवत, कश्यप संवत, कार्तिकेय संवत, वैवस्वत मनु संवत, वैवस्वत यम संवत, इक्क्षवाकु संवत, परशुराम संवत, जयाभ्युद संवत, लौकिकध्रुव संवत, भटाब्ध संवत (आर्य भट्ट), जैन युधिष्ठिर शकसंवत, शिशुनाग संवत, नंद शक, क्षुद्रक संवत, चाहमान शक, श्रीहर्ष शक, शालिवाहन शक, कल्चुरी या चेदी शक, वल्भिभंग संवत।

भारत में पंचांग का इतिहास

  • देश में सर्वाधिक प्रचलित संवत विक्रम और शक संवत है। इसके प्रणेता मालवा के सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य माने जाते हैं। उन्होंने समस्त प्रजा का ऋण चुकाकर यह संवत् शुरू किया था। माना जाता है कि विक्रम संवत गुप्त सम्राट विक्रमादित्य ने उज्जयनी में शकों को पराजित करने की याद में शुरू किया था। यह संवत 57 ईसा पूर्व शुरू हुआ था। इसे मालव संवत् भी कहा जाता है। इसमें कालगणना सूर्य और चंद्र के आधार पर की जाती है। यह चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र नवरात्र के साथ प्रारंभ होता है।
  • इसी समय चैत्र नवरात्र प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन उत्तर भारत के अलावा गुड़ी पड़वा और उगादी के रूप में भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष मनाया जाता है। सिंधी लोग इसी दिन चेटीचंड के रूप में नववर्ष मनाते हैं। शक संवत को शालीवाहन शक संवत के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि इसे शक सम्राट कनिष्क ने 78 ई में शुरू किया था। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसी शक संवत में मामूली फेरबदल करते हुए इसे राष्ट्रीय संवत के रूप में अपना लिया। राष्ट्रीय संवत का नव वर्ष 22 मार्च को होता है, जबकि लीप ईयर में यह 21 मार्च होता है।

शक संवत
यह 78 ई में शुरू हुआ था। चैत्र 1,1879 यानी 22 मार्च 1957 को इसे भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में अपनाया गया। सबसे प्रचलित मतानुसार इसे कुषाण राजा कनिष्क ने चलाया था। इसका प्रथम माह चैत्र और अंतिम महीना फाल्गुन है। इसका सबसे प्राचीन शिलालेख चालुक्य वल्लभेश्वर का है। इसकी तिथि 465 शक संवत है।

हिजरी
इस्लामिक धार्मिक पर्वों को मनाने के लिए इसका उपयोग होता है। इसमें कालगणना चंद्रमा के आधार पर की जाती है। मोहर्रम माह के प्रथम दिन नववर्ष मनाया जाता है। 62 ई में पैगंबर मोहम्मद के मक्का से मदीना जाने यानी हिजरत करने के दिन इस संवत् की शुरुआत हुई, इसलिए इसे हिजरी कहा जाता है।

सप्तर्षि संवत
कश्मीर में इस संवत को लौकिक संवत भी कहते हैं। ये चांद्र और सौर संवत है। मतानुसार 3076 ईसा पूर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को इसकी शुरुआत हुई। इस संवत के उपयोग में सामान्यत: शताब्दियां नहीं दी गई हैं। श्रीलंका के ग्रंथ महावंश में उल्लेख है कि सम्राट अशोक का राज्याभिषेक सप्तर्षि संवत 6208 में हुआ था।

ग्रेगोरियन कैलेंडर
यह सबसे प्रचलित कैलेंडर है जिसे 1558 में तेरहवें पोप ग्रेगोरी ने जूलियन कैलेंडर में सुधार कर चलाया था। इसमें लीप ईयर भी जोड़ा गया ताकि तारीख और मौसम के बीच समन्वय स्थापित हो। तब त्रुटि सुधार के लिए कैलेंडर में 10 दिन बढ़ा कर 4 अक्टूबर 1582 के बाद सीधे 15 अक्टूबर का दिन कर दिया गया था।

धर्म और संस्कृतियों पर आधारित कैलेंडर के अनुसार दुनिया में अलग-अलग तारीखों पर नया साल


ऑस्ट्रेलिया
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी मुरादोर जनजाति के लोग ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 30 अक्टूबर को नया साल मनाते थे। हालांकि, आज नया साल जनजाति के कई लोगों द्वारा नहीं मनाया जाता, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में कई त्योहार हैं जो पूरे वर्ष में आदिवासी मुराडोर की संस्कृति का जश्न मनाते हैं।

श्रीलंका
श्रीलंका के सिंहली और तमिल हिंदू अप्रैल के बीच में परिवार, दोस्तों और समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ नए साल का जश्न मनाते हैं। यहां 13-14 अप्रैल को नया साल मनाया जाता है।

कंबोडिया और वियतनाम
कंबोडिया और वियतनाम में एक समुदाय विशेष के लोग 13 से 15 अप्रैल के बीच नया साल मनाते हैं। इस दौरान यहां के लोग शुद्धि समारोह में भाग लेते हैं यानी खुद को पवित्र करते हैं और धार्मिक स्थानों पर जाते हैं। कुछ लोग दोस्तों और परिवार वालों के साथ नया साल मनाते हैं।

म्यांमार
म्यांमार में नव वर्ष अप्रैल के मध्य में मनाया जाता है। यह 13 से 16 अप्रैल के बीच मनाया जाता है। इस उत्सव को तिजान कहते हैं। जो तीन दिन चलता है। भारत में होली की तरह इस दिन एक दूसरे को पानी से भिगो देने की परंपरा है, लेकिन इस पानी में रंग की जगह इत्र होता है।

रूस, मैसेडोनिया, सर्बिया, यूक्रेन
इन जगहों पर रहने वाले पूर्वी रूढ़िवादी चर्च के लोग ग्रेगोरियन न्यू ईयर की तरह जूलियन न्यू ईयर 14 जनवरी को मनाते हैं। यहां भी आतिशबाजी, मनोरंजन के साथ अच्छा खाना खाया जाता है।

चीन
चीनी नव वर्ष हर साल जनवरी 21 और फरवरी 20 के बीच अलग-अलग तारीखों पर पड़ता है क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर पर आधारित है। यहां नए साल के लिए आधिकारिक तौर पर सात दिनों की छुट्टियां पड़ती हैं, लेकिन उत्सव आमतौर पर दो सप्ताह से ज्यादा दिनों तक चलता है।

इथियोपिया
इथियोपिया में 12 सितंबर को नया साल मनाया जाता है। नए साल का जश्न मनाने के लिए इथियोपियाई लोग गीत गाते हैं और एक-दूसरे को फूल देते हैं।

इराक, सीरिया, तुर्की और ईरान
उत्तरी इराक, उत्तर-पूर्वी सीरिया, दक्षिण-पूर्वी तुर्की और उत्तर-पश्चिमी ईरान में 1 अप्रैल को नया साल मनाया जाता है। यहां ख ब निसान नाम का त्योहार मनाया जाता है। जिसका अर्थ है अप्रैल की पहली तारीख या अप्रैल की शुरुआत। यहां इस त्योहार को ही नए साल के रूप में मनाया जाता है।

अफगानिस्तान
अफगानिस्तानमें नया साल 1 जनवरी को न मानकर अमल की पहली तारीख यानी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 21 मार्च को मनाया जाता है।

इंडोनेशिया
इंडोनेशिया में 7 मार्च को बालिनी नव वर्ष मनाया जाता है। इंडोनेशिया का ये उत्सव अन्य देशों से पूरी तरह अलग अंदाज में मनाया जाता है। इस उत्सव में जो लोग पूरी तरह से धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं, वे घर पर रहते हैं, काम नहीं करते हैं और किसी भी सुखद गतिविधियों में शामिल होने से भी बचते हैं। इसका उद्देश्य पूरा दिन चिंतन, मनन और उपवास करना होता है।

कोरिया
कोरियाई लोग चंद्र कैलेंडर के आधार पर सेलून वर्ष के पहले दिन नए साल के रूप में सल्लल नाम का त्योहार मनाते हैं, जो कि 5 फरवरी को मनाया जाता है। इस उत्सव के दौरान लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं और पारंपरिक सूप भी पीते हैं।

थाईलैंड
थाई न्यू ईयर जिसे सोंगक्रान कहा जाता है। थाईलैंड में ये नया साल 13 से 15 अप्रैल के बीच मनाया जाता है। इस त्योहार में नए साल के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एक रिवाज के तौर पर भगवान बुद्ध की मूर्तियों पर पानी छिड़का जाता है।

मंगोलिया
मंगोलिया में नया साल 16 फरवरी को मनाया जाता है। त्सागान सर एक मंगोलियाई नववर्ष उत्सव है जो 15 दिनों तक चलता है। इसके दौरान, लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने, कर्ज चुकाने और विवादों को सुलझाने के लिए इकट्ठा होते हैं।New Year 2020

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