अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
कोरबा// एक ओर सरकार गांव-गांव तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं कोरबा जिले के अंतिम छोर पर बसे जांजगीर-चांपा सीमावर्ती ग्राम रींवापार के लोग पिछले लगभग 42 घंटे से अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। सोहागपुर फीडर की बिजली गुल होने के बाद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं खुली है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार बारिश के बीच बिजली बंद है, लेकिन विभाग को इसकी कोई चिंता नहीं दिख रही। क्षेत्र के जेई से संपर्क करने की कोशिश की गई, मगर उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
हैरानी की बात यह है कि ग्रामीण खुद फाल्ट ढूंढने निकल पड़े, उन स्थानों तक पहुंचे जहां पहले अक्सर खराबी आती रही है, लेकिन वहां न कोई कर्मचारी मिला और न ही मरम्मत कार्य के कोई संकेत दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिजली विभाग कर क्या रहा है?
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात से पहले बिजली लाइनों के नीचे पेड़ों की छंटाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। आज भी कई जगहों पर तारों के नीचे पेड़ों की शाखाएं झूल रही हैं, जो विभाग की तैयारियों की पोल खोल रही हैं। यदि समय रहते रखरखाव किया गया होता तो शायद लोगों को 42 घंटे तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ता।
बिजली बंद होने से पेयजल संकट, मोबाइल नेटवर्क और चार्जिंग की समस्या के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि जब बिल समय पर जमा नहीं करने पर विभाग कार्रवाई करता है, तो 42 घंटे तक बिजली बंद रहने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
अब देखना यह होगा कि सोहागपुर फीडर की यह बड़ी लापरवाही कब तक सुर्खियों में रहती है और बिजली विभाग कब अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए रींवापार के लोगों को अंधेरे से राहत दिलाता है।






