झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट
झालावाड़, 03 जुलाई।
भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने आज राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर, झालावाड़ के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में गुजरात के डेडियापाड़ा से विधायक चैतर भाई वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा एवं अन्य आदिवासी साथियों को सुनाई गई सात वर्ष की सजा को राजनीतिक षड्यंत्र का परिणाम बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत सजा माफ करने की मांग की गई।
पार्टी ने बताया कि डेडियापाड़ा गुजरात का अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Areas Part-A State Order, 1950) है। उनका कहना है कि आजादी से पहले इस क्षेत्र में भारतीय वन अधिनियम, 1927 लागू नहीं था तथा इस विषय पर महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न मौजूद हैं, जिनका परीक्षण सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ एवं राष्ट्रपति स्तर पर होना चाहिए।
30 अक्टूबर 2023 को वन भूमि विवाद के दौरान विधायक चैतर भाई वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा सहित नौ लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। पार्टी का आरोप है कि आदिवासी किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाने के बाद ग्राम सभा एवं पंचायत स्तर पर समाधान की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन राजनीतिक द्वेष के चलते इस पूरे मामले को गलत रूप देकर एफआईआर दर्ज की गई और 23 जून 2026 को 7 वर्ष की सजा दिलाई गई।
भारत आदिवासी पार्टी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि अनुच्छेद 72 के तहत अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर चैतर भाई वसावा की सजा माफ की जाए। साथ ही देश के सभी राज्यपालों की बैठक बुलाकर अनुसूचित क्षेत्रों में वन अधिनियम 1927, वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 तथा वनाधिकार अधिनियम 2006 की संवैधानिक वैधता एवं क्रियान्वयन की समीक्षा कराई जाए।
पार्टी ने यह भी कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में सबसे बड़ा संवैधानिक प्रश्न यह है कि “अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी समाज पहले है या वन विभाग?” इस प्रश्न का समाधान संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, ताकि आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
ज्ञापन सौंपने के दौरान भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष राजकुमार कटारा, जिला प्रवक्ता राजेश कुमार भील, कार्तिक जी, अनिल जी चौहान, सत्तू चौहान, सुजान जी मनोज राजपुरा भीमराज राजपुरा सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





