February 8, 2023

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बगदादी का खात्मा करने वाले कौन हैं अमेरिका के डेल्टा कमांडो, जानें उनके बारे में

आईएस सरगना बगदादी को मार गिराने वाली अमेरिका के डेल्टा कमांडो आतंकवादी ठिकानों को नेस्तानाबूद करने में माहिर हैं। इसके साथ ही डेल्टा कमांडो बंधक जैसी स्थिति से निपटने में भी सक्षम हैं। इसका पूरा नाम फर्स्ट स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशनल डिटैचमेंट (डेल्टा) है। इसे कॉम्बैट एप्लिकेशंस ग्रुप (सीएजी) या आर्मी कंपार्मेंटेड एलिमेंट (एसीई) के नाम से भी जाना जाता है। नेवी सील टीम के साथ आतंकवाद रोधी मिशनों को अंजाम देना मुख्य रूप से इसका काम है।

अंधेरे में चौकन्ना
ईएनवीजी-3 चश्मे लगाए होते हैं
अंधेरे में खतरे का आभास हो जाता है

विशेष राइफल
एचके416 कार्बाइन से लैस होते हैं
इससे विशेष गन से ग्रेनेड भी लांच किया जा सकता है
इसके साथ ग्लॉक की 9 एमएम की पिस्टल और कोल्ट एम1911 भी रखते हैं

बुलेट प्रुफ जैकेट
केवलर लगी वर्दी नजदीक से मारी गई गोली को भी रोकने में सक्षम

थलसेना के अधीन
डेल्टा कमांडो अमेरिकी थलसेना के डिविजन के अधीन काम करती है। 
ज्वॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमान के पास इसका ऑपरेशनल कंट्रोल होता है।
1977 को डेल्टा कमांडो को मान्यता मिली। चार्ली बेकविथ पहले कमांडर थे।

ऐसे होता है चयन
डेल्टा फोर्स के कमांडों को ऑपरेटर के नाम से जाना जाता है
अमेरिकी सेना के एलीट स्पेशल फोर्सेज ग्रुप और 75वें रेंजर रेजिमेंट के लोग इसमे शामिल होते हैं 
2.5 साल की सेवा बाकी रहने वाले ई4-ई8 रैंक के अफसरों का चयन डेल्टा कमांडो के लिए होता है
 
सख्त प्रशिक्षण
डेल्टा फोर्स के कमांडो को काफी सख्त प्रशिक्षण के दौर से गुजरना होता है। 
चयन के बाद रंगरूटों के लिए छह महीने का ऑपरेटर ट्रेनिंग कोर्स (ओटीसी) होता है।
इसमें दुश्मनों के गढ़ में घुसने और उन्हें ध्वस्त करने और सुरक्षित बाहर निकलने की ट्रेनिंग दी जाती है। 
 
पहला अभियान नाकाम
डेल्टा फोर्स ने पहला अभियान ऑपरेशन ईगल क्लॉ नवंबर 1979 में अंजाम दिया था लेकिन वह नाकाम रहा। इस दौरान तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास के राजनयिकों और नागरिकों को बंधक बना लिया गया था। उन बंधकों को छुड़ाने के लिए अमेरिका की ओर से ऑपरेशन ईगल क्लॉ चलाया गया था जो बुरी तरह नाकाम रहा था।

इन अभियानों में मुख्य भूमिका
खाड़ी युद्ध: खाड़ी युद्ध के दौरान इराक ने कुवैत पर हमला कर दिया था। अमेरिका के नेतृत्व में सहयोगी देशों की सेनाओं ने सद्दाम हुसैन और उसकी सेना को हराया और वापस उनको इराक की ओर खदेड़ा था।
ऑपरेशन रेड डाउन: इराक में सद्दाम हुसैन का पता लगाने और पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान को ऑपरेशन रेड डाउन के नाम से जाना गया।

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